क्या आप जानते है भगवान शिव जी की बहन के बारे
दोस्तों क्या आप जानते है भगवान शिव जी की बहन के बारे में जानने के लिए यह ब्लॉग को पूरा पढ़े
नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत है
यहाँ पर आपको बहुत सी अनसुनी बाते पड़ने को मिलेगी आज हम आपको बताएगे की भगवान शिव जी की बहन कौन थी आज हम आपको बताएगे शिव पुराण से जुडी एक रहस्यमयी कथा |भगवान शिवजी की पत्नी और बच्चो के बारे में तो आपको पता ही होगा लेकिन क्या आप सब को यह भी पता है क्या भगवान शिव की एक बहन भी है जब माता पारवती जी ने भगवान शिव जी से विवाह किया तो वो खुद को घर में अकेला महसूस करती थी उनकी इच्छा थी की उनकी एक ननन्द होती जिससे उनका मन लगा रहता लेकिन भगवान शिव जी तो अन्तरयामी है
सब जानते है उन्होंने देवी पर्ववती की मन की बात जान ली उन्होंने पारवती से पूछा कोई समस्या है देवी तो देवी पार्वती ने कहा की काश उनकी कोई ननन्द होती भगवान शिव ने कहा की मै आपको ननन्द लाकर देदू लेकिन क्या ननन्द की आपके साथ बनेगी पारवती जी ने कहा भगवान ननन्द से मेरी क्यों नहीं बनेगी भगवान शिवजी ने कहा ठीक है देवी मै आपको एक ननन्द लाकर दे देता हू, भगवान शिवजी ने अपनी शक्ति और माया से एक देवी उत्पन कर दी भगवान शिव ने यह कहा की यह लो आपकी ननन्द आ गयी इसका नाम असावरी देवी है देवी पारवती अपनी ननन्द को देख कर बहुत खुश होई असावरी देवी नहा कर आयी और भोजन मांगने लगी देवी पारवती ने भोजन परोस दिया जब असावरी देवी ने खाना शुरू किया तो पारवती के भंडार में जो कुछ भी था सब खा गयी और महादेव जी के लिए भी कुछ न बचा ,इस बात से पारवती दुखी हो गयी इसके बाद जब देवी पारवती ने ननन्द को पहनने के लिए नए वस्त्र दिए तो मोटी असावरी देवी के लिए वो वस्त्र छोटे पड़ गए माता पारवती उसके लिए दूसरे नए वस्त्र का इंतज़ाम करने लगी इस बीच ननन्द को अचानक मज़ाक सुजा और उन्होंने अपने पैरो की दरार में अपनी भाभी यानि माता पारवती को छुपा लिया
पारवती जी का दम घुटने लगा महादेव जी ने जब असावरी देवी से माता पारवती के बारे पूछा तो असावरी देवी ने झूठ बोला जब शिवजी ने कहा कही यह तुम्हारी बदमाशी तो नहीं तो असावरी देवी हसने लगी और जमीन पर पैर पटक दिया इस से पैर की दरारों में फसी देवी पारवती बाहर आ गयी उदर ननन्द के विवहार से देवी पारवती का गुस्सा बहुत बढ़ गया था देवी पारवती ने भगवान शिवजी से कहा किरपा करके ननन्द को जल्दी ससुराल भेजने की किरपा करे मुझ से बहुत बड़ी भूल होई की मैंने ननन्द की चाह की इससे भगवान शिव ने देवी असावरी देवी को कैलाश से विदा कर दिया

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